पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कश्मीर और बांग्लादेश की स्थितियों को देखने के बावजूद अगर हम सतर्क नहीं हो रहे हैं, तो यह हमारी मूर्खता है। हम एक बुरा देश छोड़कर जा रहे हैं। हमारे बच्चों के लिए रास्ता…अगर संयुक्त राष्ट्र पूरी दुनिया की ज़िम्मेदारी लेता है,
वाराणसी में कथा कहने पहुंचे देवकीनंदन ठाकुर।
सनातन बोर्ड की करता हूं मांग
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा – भारत में अगर पाकिस्तान बनने के बाद भी वक्त बोर्ड है तो स्वतंत्र सनातन बोर्ड क्यों नहीं है। यह यहां के विद्वानों को सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे भगवान को क्या भोग लगेगा यह सरकारी अधिकारी नहीं तय करेंगे यह हमारे संत और महात्मा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि मेरे भगवान को चर्बी का भोग लगा कौन जाने बाबा विश्वनाथ धाम में कौन सा भोग लगा रहा है जो तिरुपति बालाजी में लगा हुआ कैसा था हम वह सब देख चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम मस्जिद और चर्च नहीं मांग रहे हम बस अपने मंदिर को स्वतंत्र चाहते हैं मंदिर सरकार के व्यवस्था से नहीं चलेगा। हमारे भगवान की पूजा सनातन बोर्ड के माध्यम से होगी।
कथा में शामिल हुए हजारों लोगों सनातनी।
काशी में संतों और विद्वानों का मिलेगा आशीर्वाद
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि मैं काशी आया हूं और मैंने सुना है कि काशी आने के बाद कोई यहां से खाली नहीं जाता है। मैं यहां के संत और महात्मा से आशीर्वाद चाहता हूं उन्होंने कहा कि यहां जितने भी विद्वान हैं वह सब शंकर भगवान के स्वरूप हैं। मैं उन सब सेवा वरदान और आशीर्वाद चाहता हूं एक इच्छा चाहता हूं कि आप सभी सनातनी बोर्ड की मांग करें।
काशी धरती का स्थान नहीं
भागवत वक्ता ने कहा कि काशी इस धरती का स्थान नहीं है, यह बाबा विश्वनाथ का आनंद वन है। प्रलय काल में इस अविनाशी काशी को बाबा अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं। यही एक नगरी है जो सदा थी, सदा है और सदा रहेगी।
मंच से सनातन बोर्ड के गठन की मांग।
माता-पिता की सेवा अवश्य करो
कथा श्रवण कराते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जीवन में किसी की सेवा करो ना करो, माता-पिता, अपने धर्म और अपने देश की सेवा जरूर करो। इनकी सेवा का देवता भी हाथ जोड़कर स्वागत करते है। पुत्र जन्म ले लेना ही सौभाग्य नहीं होता। धुंधकारी जैसा दूषित पुत्र हुआ तो सर्वस्व नष्ट हो जाएगा। गौकर्ण जैसा सत्कर्मी हुआ तो जीवन धन्य हो जाएगा।
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