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(Butcher of Media) मीडिया का कसाई या गोदी मीडिया …

(Butcher of Media) मीडिया का कसाई या गोदी मीडिया

आइए आज जानते हैं कि गोदी मीडिया को आप सिर्फ़ गोदी मीडिया की हद तक जानते हैं या कुछ और भी जबकि वह गोदी मीडिया तक सीमित नहीं  है ।

कैसे पहचान होगी कि यह सिर्फ़ गोदी मीडिया है या मीडिया का कसाई”

इस के लिए कुछ चीज़ों का समझना ज़रूरी है….

अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुलकर अब गोदी मीडिया पर बोल रहे हैं लेकिन वह क़साई मीडिया तक अभी भी कुछ नहीं बोल रहे हैं।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुलकर अब गोदी मीडिया पर बोल रहे हैं लेकिन वह क़साई मीडिया पर अभी भी कुछ नहीं बोल रहे हैं।

👉 मीडिया चाहे वह प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक या सोशल इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है।

👉मीडिया का काम है सच्चाई का आम लोगों तक पोंहचाना,

👉मीडिया का काम सिर्फ़ समस्या का उठाना नहीं है,

👉 मीडिया का काम समस्या के साथ उस समस्या का समाधान खोजना भी है, 

👉अगर वह सच्चाई छुपा रहा है तो गोदी मीडिया है,

👉अगर वह झूठ परोस रहा है और उस झूठ से किसी का नुक़सान ना कर के सिर्फ़ अपना फ़ाएदा उठाना मक़सद है तो भी यह गोदी मीडिया है, 

🫵 लेकिन अब सवाल यह है की जब यह गोदी मीडिया है तो फ़िर “मीडिया का कसाई” कौन है ?

👉मीडिया का क़साई मतलब वह मीडिया जो पत्रकारिता का क़ातिल है …..

आप देख रहे होंगे आज तक गोदी मीडिया का चेहरा लेकिन आप को बहुत समय बाद नज़र आएगा की बात सिर्फ़ गोदी मीडिया तक ही सीमित नहीं थी । इस लिए आप के लिए ज़रूरी है यह जान लेना की मीडिया का कसाई का भूत बोतल से कैसे बाहर निकला? बाहर तभी निकलता है जब होता है! 

👉 देश का वह मीडिया जिसे आप गोदी मीडिया कह कर छोड़ दे रहे हैं हक़ीक़त में वह मीडिया का क़साई है जो सिर्फ़ झूठ तो बोलता ही है साथ ही साथ साज़िश भी रचता है। 

जैसा कि आप उदाहरण के लिए देख सकते हैं…..

👉ईरान में शिया समुदाय के आठवें इमाम हज़रत अली पिज़्ज़ा (अ०) के जन्म दिवस पर जो आतिशबाज़ी हो रही थी यह क़साई मीडिया उसको लिखता है कि ईरान के लोग अपने शहीदों की ख़बर से ख़ुश हैं, 

वहीं आज जब ईरान के जाँबाज़ राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी और उनके जनाज़े दिखाई पड़े तो इस क़साई मीडिया को साँप सूंघ गया । 

ईरान के लोग अपने मुल्क से जितना मुहब्बत करते हैं इसका अंदाज़ा आप लगा नहीं सकते।

जब क़ासिम सुलेमानी की शहादत हुई थी तब भी एक मीडिया के ख़ास तबक़े ने इस तरह की न्यूज़ चलाईं थी कि ईरान की अवाम मुख़ालिफ़ है लेकिन रिज़ल्ट इस के ख़िलाफ़ देखने को मिला था। ईरान के लोग जो कहीं भी किसी भी देश में रह रहे थे एक साथ ईरान की आवाज़ में आवाज़ मिलाते हुए दिखाई दिए थे। 

👉 जिस मीडिया को अपने पास होने वाली और अपने देश की घटनाओं के बारे में जानकारी नहीं है। वह इज़राइल की रिपोर्ट पेश कर रहा है ।

👉 साज़िश रचने के साथ नफ़रत का सौदागर भी बना हुआ है। 

🫵 देश के ख़िलाफ़ कहीं बड़ी साज़िश तो नहीं कर रहा यह मीडिया? इस लिए की जिस के सम्मान के लिए हमारे देश का झंडा झुकाया गया उसी को क़साई लिख रहा है । 

अगर आप ने इसका विरोध ना किया तो कल आपकी नसलें इस अंधेरे कुए से निकल नहीं पाएंगी ।

वक़्त रहते अपनी आवाज़ उठाइये वरना देर हो जाएगी ।

:- संजय पत्रकार (लखनऊ) 

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