किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के हिमैटोलॉजी विभाग में दिसंबर से बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने जा रही है। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि 11 दिसंबर से यह सेवा शुरू होगी। विभाग में फिलहाल 65 बेड हैं, जिनमें से 10 बेड विशेष रूप से बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए आरक्षित होंगे।
डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने राजधानी में आयोजित इंडियन सोसाइटी ऑफ हिमैटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन के वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को गुणवत्तापूर्ण इलाज के साथ सस्ती चिकित्सा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास करने चाहिए ताकि हर मरीज को उपचार मिल सके। उन्होंने बताया कि कैंसर का इलाज महंगा है, लेकिन अब लोग शुरुआती अवस्था में इलाज के लिए आ रहे हैं, जिससे बेहतर नतीजे मिल रहे हैं।
हिमैटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी वर्मा ने बताया कि शुरुआत में मरीजों के भाई या बहन से बोन मैरो लेकर ट्रांसप्लांट किया जाएगा। जब शरीर पर्याप्त स्वस्थ रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता, तो स्वस्थ दाता से बोन मैरो लेकर मरीज में प्रत्यारोपित किया जाता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बुजुर्ग मरीजों या मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (MDS) जैसी स्थितियों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट चुनौतीपूर्ण होता है और कई बार कीमोथेरेपी ही विकल्प बचता है।
सम्मेलन में देश के वरिष्ठ हिमैटोलॉजिस्ट डॉ. एमबी अग्रवाल, डॉ. टीके दत्ता और डॉ. रेनू सक्सेना को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस दौरान सम्मेलन की जर्नल का विमोचन भी किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, थैलेसीमिया, एप्लास्टिक एनीमिया और मल्टीपल मायलोमा जैसे रोगों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट बेहद प्रभावी उपचार साबित हो सकता है। वहीं, कोशिका थेरेपी में आई नई प्रगति से इलाज के और विकल्प खुल रहे हैं।
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