मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। United States और Iran के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत के समानांतर सैन्य गतिविधियां तेज होने से संभावित टकराव की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
17 फरवरी 2026 को जिनेवा में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच परमाणु वार्ता का दौर चला, लेकिन उसी समय क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया।
सैन्य गतिविधियों में तेजी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते 24 घंटों में अमेरिका ने 50 से अधिक लड़ाकू विमान मध्य पूर्व क्षेत्र में तैनात किए हैं। इनमें अत्याधुनिक F-35, F-22 और F-16 विमान शामिल बताए जा रहे हैं। साथ ही 150 से अधिक सैन्य कार्गो विमानों के जरिए हथियार और गोला-बारूद भेजे जाने की भी चर्चा है।
इन घटनाक्रमों ने संभावित सैन्य अभियान की अटकलों को तेज कर दिया है।
ट्रंप और खामेनेई के तीखे बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने परमाणु समझौते पर सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने भी कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी।
रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि संभावित सैन्य अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है और इसमें Israel की भूमिका भी अहम हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वार्ता जारी, मतभेद बरकरार
जिनेवा में हुई बैठक में ट्रंप प्रशासन के प्रतिनिधियों ने ईरान के विदेश मंत्री से लंबी बातचीत की। दोनों पक्षों ने वार्ता को “रचनात्मक” बताया, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर मतभेद गहरे हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप समझौता चाहते हैं, लेकिन उन्होंने कुछ “रेड लाइन” तय की हैं, जिन पर समझौता मुश्किल दिखता है।
क्या सच में तय है जंग?
विश्लेषकों का मानना है कि भारी सैन्य तैनाती दबाव की रणनीति भी हो सकती है, ताकि वार्ता में बढ़त हासिल की जा सके। हालांकि, क्षेत्र में बढ़ती सैन्य हलचल ने अनिश्चितता जरूर बढ़ा दी है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले कुछ सप्ताह इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकते हैं।
Global Express Live