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खैबर शेकन (Kheibar Shekan) कौन सी है Iran की वो मिसाइल जिसे Israel का आयरन डोम सुरक्षा कवच भी नहीं रोक पाया…

1-कौन सी है Iran की वो मिसाइल जिसे Israel का आयरन डोम सुरक्षा कवच भी नहीं रोक पाया…

2-आयरन डोम से बचने वाली इन्हीं सात मिसाइलों ने इजरायल के सुरक्षा कवच पर चिंता पैदा कर दी है.

3-सात मिसाइलों ने इजरायल के नेवातिम एयरबेस के आसपास तबाही मचाई. ये ईरान की वो मिसाइल है, जिसने इजरायल के रक्षा कवच को तोड़ दिया.

4-इस मिसाइल का नाम है खैबर शेकन (Kheibar Shekan). यह एक मीडियम रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल हैं. इसका संचालन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स एयरोस्पेस फोर्स करता है.

5-खैबर शेकन (Kheibar Shekan)मिसाइल.

6-खैबर को ही क्यों चुना ईरान ने इज़रायेल के लिये ?
7- ईरान के लीडर सय्यद अली खामनायी हैं कौन ?

 

इजरायल के आयरन डोम ने ईरान की 331 मिसाइलों और ड्रोन हमलों में से 99% को मार गिराया. सिर्फ एक मिसाइल ऐसी थी, जिसने इजरायल के सुरक्षा कवच में छेद कर दिया. नेवातिम एयरबेस को काफी नुकसान पहुंचाया. अब इजरायल अपने आयरन डोम को और मजबूत करने में लगा है.

ईरान ने इजरायल के ऊपर 120 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इजरायल के आयरन डोम (Iron Dome) ने ज्यादातर मार गिराईं, लेकिन सात मिसाइलों ने इजरायल के नेवातिम एयरबेस के आसपास तबाही मचाई. ये ईरान की वो मिसाइल है, जिसने इजरायल के रक्षा कवच को तोड़ दिया.

नेवातिम एयरबेस पर इजरायल के F-35S फाइटर जेट्स की तैनाती है. ये वही फाइटर जेट्स हैं, जिनके जरिए इजरायल ने गाजा पर पिछले साल बमबारी की थी. आयरन डोम से बचने वाली इन्हीं सात मिसाइलों ने इजरायल के सुरक्षा कवच पर चिंता पैदा कर दी है. इजरायल अब इसे और सुधारने की तैयारी कर रहा है.

इस मिसाइल का नाम है खैबर शेकन (Kheibar Shekan). यह एक मीडियम रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल हैं. इसका संचालन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स एयरोस्पेस फोर्स करता है.

कौन सी है वो मिसाइल, जिसने आयरन डोम को छेद दिया…

इस मिसाइल का नाम है खैबर शेकन (Kheibar Shekan). यह एक मीडियम रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल हैं. इसका संचालन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स एयरोस्पेस फोर्स करता है. यह अपने सीरीज में तीसरी पीढ़ी की मिसाइल है. यह सॉलिड फ्यूल से उड़ने वाली और किसी भी मिसाइल शील्ड को छेद सकने वाली मिसाइल है.

खैबर को ही क्यों चुना ईरान ने इज़रायेल के लिये ?

ये भी एक अहम बात है कि ईरान ने सबसे पहले “खैबर शिकन ” को ही क्यों चुना,इसके पीछे एक खास बात है कि 1400 साल पहले जब य़ाहोदी आबादी वाला किला किसि से फतेह नही हो पा रहा था तो आखिर में हज़रत अली (अस.) ने उसको फतेह किया था | उसका दरवाज़ाह (Gate) उठाकर पठक दिया था ,इसी लिए ईरान ने खैबर शिकन मीज़ाइल का इस्तेमाल किया ताकी संदेश साफ़ जाये की हम जो कहते हैं वो करते हैं |

ईरान के लीडर सय्यद अली खामनायी हैं कौन ?

उनही हज़रत अली (अस.) की नसल से ईरान के लीडर सय्यद अली खामनायी भी हैं |
इसी लिए ईरान ने खैबर शिकन मीज़ाइल का इस्तेमाल किया ताकी संदेश साफ़ जाये की हम जो कहते हैं वो करते हैं |

सबसे बड़ा दुनिया का लीडर इनको इसलिये भी माना जाता है कि जो कहते हैं वो करते भी हैं ,
खूफिया जानकारियो के बेस पे नहीं बल्की ईरान के लीडर सय्यद अली खामनायी के बयान पे अमेरिका और दुनिया ने समझ लिया था कि उनका कहना सिर्फ बात नहीं है बल्की ऐकशन होना ही है |
कहकर हमला करना और सिर्फ उस बेस को टार्गेट बनाना जहां से सिरिया में उनके फौजियो को मारा गया था | इज़रायेल और साथी देश बचाने मैं थे लेकिन तब भी खैबर शिकन को रोक नहीं पाये ,

अभी फतताह (विजयी ) के बारे में किसी ने कोयी बात नहीं की और अब ईरान अपनी मीज़ाइल ताकत का लोहा मनवा चुका है |

अभी भी दुनिया में ईरान को लेकर बातें हो रही हैं कि इज़रायेल हमला कर सकता है लेकिन ईरान की तरफ़ से जवाब मिलने के बाद अमेरिका भी डरा डरा सा नज़र आ रहा है और इज़रायेल अगर ग़लती करता है तो ईरान ने कहा है कि इसबार वोह इस्तेमाल करेगा जिस्की कल्पना भी नहीं की गयी होगी |

(:-मिर्ज़ा नुसरत अली )

 

 

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