राज्यसभा चुनाव 2026 में विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। सोमवार को 11 सीटों के लिए हुए मतदान में बिहार, ओडिशा और हरियाणा में वोटिंग हुई। इन चुनावों में कई जगह विपक्ष अपने विधायकों को एकजुट रखने में नाकाम रहा, जिसका सीधा फायदा NDA को मिला।
बिहार में NDA का कब्जा
बिहार की 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 5 NDA और 1 महागठबंधन का था। NDA ने सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज कर ली। विजेताओं में नीतीश कुमार, नितिन नवीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश राम शामिल हैं।
जीत के लिए 41 वोट जरूरी थे। 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक थे, जबकि महागठबंधन के पास 35 विधायक थे।
विपक्षी उम्मीदवार A.D. सिंह को AIMIM और BSP का समर्थन मिलने के बावजूद झटका लगा। विपक्ष के 4 विधायक—जिनमें 3 कांग्रेस और 1 राजद के थे—वोटिंग में शामिल नहीं हुए। पहली वरीयता में फैसला नहीं होने के बाद दूसरी वरीयता की गिनती में शिवेश राम जीत गए। इसके बाद महागठबंधन ने भाजपा पर दबाव और खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए।
ओडिशा में क्रॉस वोटिंग से उलटफेर
ओडिशा में 4 सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में थे। यहां जीत के लिए 30 वोट जरूरी थे। भाजपा के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार ने जीत दर्ज की, जबकि बीजद के संतनु मिश्रा भी सफल रहे।
सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने भी जीत हासिल कर ली। 147 सदस्यीय विधानसभा में बीजद और कांग्रेस के पास अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या थी, लेकिन बीजद के 8 और कांग्रेस के 3 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी।
इस घटनाक्रम के बाद नवीन पटनायक ने भाजपा पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए और पार्टी लाइन से हटकर वोट करने वाले विधायकों पर कार्रवाई की बात कही।
हरियाणा में एक-एक सीट पर जीत
हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। वोटिंग के दौरान गोपनीयता भंग होने की शिकायतों के चलते मतगणना करीब 5 घंटे तक रुकी रही।
आखिरकार भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा।
26 सीटों पर निर्विरोध जीत
भारत का चुनाव आयोग ने पहले 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा की थी। इनमें से 7 राज्यों की 26 सीटों पर केवल एक उम्मीदवार होने के कारण मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और वे निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
इनमें शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी, रामदास अठावले और तिरुचि शिवा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
इस तरह राज्यसभा चुनाव 2026 में कई राज्यों में सियासी समीकरण बदले और खासतौर पर बिहार व ओडिशा के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
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